Sunday, July 21, 2024
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माता वैष्णो देवी का इतिहास

तो दोस्तों आपको हमारे भारत में स्थित वैष्णो देवी मंदिर के बारे में तो मालूम ही होगा। तो क्या आपको उस मंदिर का इतिहास मालूम है। यानी कि क्या आपको यह मालूम है कि वैष्णो देवी वहा कैसे प्रकट हुई। अगर नहीं तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको माता वैष्णो देवी के इतिहास के बारे में बताने वाले हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको उस मंदिर के इतिहास के बारे में तो बताएंगे ही, साथ ही साथ हम आपको Vaishno Devi Chalisa के बारे में ही बताएंगे। तो चलिए बिना किसी देरी के इस आर्टिकल में आगे बढ़ते हैं।

माता वैष्णो देवी का जन्म कब हुआ था?

हम आपको बता दें कि माता वैष्णो देवी का जन्म दक्षिणी भारत में रत्नाकर नामक एक व्यक्ति के घर में हुआ था, और जिस घर में वैष्णो देवी का जन्म हुआ था, उस घर में माता वैष्णो देवी से पहले उनके माता-पिता नि: संतानी ही रहे थे, और जिस दिन माता वैष्णो देवी का जन्म हुआ था उसके 1 दिन पहले उनकी माता ने यह वचन दिया था कि उनकी बेटी जो भी चाहे वह उनके रास्ते में नहीं आएगी। वैसे तो बचपन में इनका नाम त्रिकुटा था, लेकिन बाद में विष्णु वंश में जन्म होने के कारण उनका नाम वैष्णवी रखा गया। इतना ही नहीं पौराणिक कथा के अनुसार हमें यह पता चलता है कि त्रेतायुग के समय वैष्णो देवी ने ही मानव कल्याण के लिए पार्वती लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में एक सुंदर राजकुमारी का रूप धारण किया था।

माता वैष्णो देवी मंदिर का इतिहास

 अब बात आती है माता वैष्णो देवी मंदिर के इतिहास के बारे में, तो यह मंदिर हमारे भारत के जम्मू में कटरा से लगभग 14 किलोमीटर दूर त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है, और यह भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अगर बात की जाये की इस स्थान पर ही इस मंदिर का निर्माण क्यों किया गया, तो हम आपको बता दें कि स्थान पर मंदिर का निर्माण श्रीधर नामक एक पुजारी ने किया था। कहा जाता है कि एक बार श्रीधर नाम का एक व्यक्ति अपने गांव वालों को भंडारा करवाना चाहता था, लेकिन उसे इस बात की चिंता थी कि वह इतने सारे लोगों को एक साथ भंडारा कैसे करवा पाएगा। इसलिए भंडारे के एक दिन पहले वह चिंता में डूबा रहता है और सब कुछ किस्मत के भरोसे छोड़ कर सो जाता है। 

 

लेकिन अगले दिन जब सब गांव वाले आते हैं तब श्रीधर देखता है कि एक छोटी सी बच्ची भंडारा में मदद कर रही है, और भंडारा सफलतापूर्वक आयोजित हो रहा है। इससे वह बहुत ही ज्यादा खुश हो जाता है। श्रीधर का भंडारा सफलतापूर्वक समाप्त होता है, लेकिन इसमें भैरव नाथ जी का मन नहीं भरता है। वह अपने जानवरों के लिए और भोजन हेतु आग्रह करते हैं जिसके लिए वह छोटी सी बच्ची मना कर देती है। जिससे नाराज होकर भैरव नाथ जी ने उसे पकड़ने की कोशिश करते है और अचानक ही वह बच्ची गायब हो गई। जिससे कि श्रीधर बहुत ही ज्यादा दुखी हो गए। लेकिन इसी के बाद रात को सोते समय श्रीधर को सपना आया जिसमें कि वैष्णो देवी ने श्रीधर को बताया कि वह छोटी सी बच्ची में ही थी, और इतना ही नहीं माता वैष्णो देवी ने स्वयं श्रीधर को त्रिकुटा पर्वत पर एक गुफा के बारे में बताया, और जब श्रीधर उस गुफा में गया तो उसे वहां माता की मूर्ति मिली, और इसी कारण श्रीधर ने उस स्थान पर उस मंदिर का निर्माण किया, जो आज के समय में माता रानी और माता वैष्णो देवी मंदिर के नाम से प्रख्यात है।

Conclusion

तो दोस्तों यह थी माता वैष्णो देवी का इतिहास और वैष्णव माता के जन्म के बारे में कुछ जानकारी। तो अब तो आपको वैष्णव देवी के बारे में पूरी जानकारी  मिल ही गई होगी, तो अगर आप वैष्णो देवी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो आप वैष्णव चालीसा का पाठ कर सकते हैं जिससे वैष्णव देवी बहुत ही ज्यादा प्रसन्न होंगी।

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